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ऐक सच्चा अनुभव | sexyhindistory


ऐक सच्चा अनुभव
ऐक दीन मेरे दोस्त राकेश के घर पे कोई नही था ईसी लिये मेनेँ मेरे दोस्त को मना लीया ओर उस ने मुजेँ 2 घंटेँ के लिये अपने फलेँट कि चाबी दी
स्विती उसकी सहेली दीपिका को ले कर मेरे कहेने पर मेरे दोस्त राकेश के घर आ गईं, मेने दिपीका को शुक्रिया किया थोडी देँर बात करके दिपीका हमे अकेला छोड बहार चली गई स्विती को पहेले थोडी शँम आई पर मेने दिपीका के जाते ही फलेट का दरवाजा बँघ कर दियाँ
और फोरन मे स्विती से लिपट गया । उसके चहेरे पर थोडी गभराट दीखती थी मेने कहा " स्विती गभरावो मत मुज पे यकिन रखोँ मेँ तुमारी मरजी के खीलाफ कुछ भी नही करुगा "
वो भी मुजे लिपतते बोली मुजे तुम पे पूरा यकिन हैँ । फिर मेने घीरे से अपने दोँनो पैँर उसकी दोँनो पैर की पानी पेँ रख दिये, वो बोली " अमर तुम ये कया कर रहे होँ " मेँ उसके उपर खडा हो गया मेरा पुरा वजन उसके पैर कि पानी पर था उसे लिपतते हुऐ मैने पुछा " कयु मेरा वजन लग रहा हैँ ? "
उसने शरमाते हुऐ मेरी बाँह मे शिर हिलाते हुऐ ना कहाँ " फिर मेने उसके हिप्स को थोडा पिछे से चिमटा भरते कहा तो फिर चलो अब मुजे तुम अपने पैँरो पे चलाके ही अँदर ले चलोँ
और वो मुजे अपने पैर की पानी पेँ उपर उठाये मुजे लिपटे हुऐ बडे आराम से 10-12 कदम चलके अंदर ले आई मेँ उसके उपर से उतर गया ।
हम अदँर आये अंदर ऍक बेंड था और बाजु मेँ ऐक खुरशी पडी थीँ मेने उसे खुरशी पे बेँठने को कहा
वो खुरशी पे बेठी और मे उसकी बाजुमे दिवाल के सहारे खडा रहा थोडी मीनीटो के बाद मेने उसे कहा ये अरछा हैँ मेँडम, आप आराम से बैठी रहो और मे खडा रहू. भले फिर मेरे पैर ठक जाये तो कोई बात नहीँ कयु शरम नही आती तुमको, मुजे बैठने को भी बोल नही शकती । वो बोली " ठीक हैँ बाबा. मे कया करु, तुम बैठजाओ मेँ खडी रहेती हु. वैसे भी मे नही ठकुगी
" बोल के वह खडी हो गई और मुजे खुरशी पै बैठने को कहा मे खुरशी पे बेठ गया 5 मीनीट बाद उसको मेरी गोँड मे बैठ जाने को मैने कहा वो उसने मना करते कहा " मे ठिक हुँ मे तुमारी तरह कमजोर नही जो 5 मीनिट मे थक जाउ " मैने कहा " मे जानता हु लेकिन अगर तुम मेरे गोद मे बैठोगी तो हम दोनो बैठ के बाते कर शकते हैँ वैसे खडी तुम रहोगी और पैर मेरे डुखेगेँ ओर फिर हम दोनो मे से कीसि ऐक को खडे रहके अपने पैर दुखाने कि कया जरुरत है "
उसने मेरी तरफ तांका फिर जैसे मुजे ऐकदम ओडँर करते कहा " खुरशी मे से खडे हो जाओ " और मे खुरशी पे से खडा हुवा वैसे ही वो खुरशी पे बैठ गई और उसने अपनी गोड को हलके हाथो से बराबर करते बोली " ठिक है अब तुम मेरे पैर पे बैठो " बोल कै उसने मुजे उसकी गोद मे बैठ जाने का ...
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