शीघ्र पतन का मतलब है कि सेक्स के समय स्त्री के झड़ने से कहीं पहले झड़ जाना.
इस स्थिति में क्योंकि स्त्री को ओर्गास्म नहीं होता है इसलिए उसकी सेक्स की चाहत अधूरी रह जाती है
और सेक्स की अधूरी चाहत से चिडचिडापन बना रहता है, किसी काम में मन नहीं लगताऔर इस स्थिति में यदि किसी अन्य पुरुष उसकी और हाथ बढाये तो दूसरे पुरुष से शारीरिक सम्बन्ध बन जाना स्वाभाविक है.
वैसे देखा जाय तो यह एक मानसिक रूप से ठीक हो जाने वाली बीमारी है
नीम हकीम से अपना इलाज करवाना मतलब अपना धन और स्वस्थ्य से खिलवाड़ करना होता है.
टेंशन से दूर रहिये, यदि तम्बाकू और धूम्रपान का सेवन करते हो तो बंद कर दीजिये
खाने पीने में भिगोई हुई दालें, पनीर, दूध, हरी सब्जिया, सलाद आदि की मात्र बढा दीजिये
यदि हस्तमैथुन या सेक्स प्रतिदिन या एक दिन में अधिक बार करते हो तो ५ से ७ दिन में एक बार कर दीजिये. इस से यदि पहली बार जल्दी हो भी गया तो दूसरी बार का टाइम बढ़ जाएगा.
जल्दी उत्तेजित मत होइए, एवं जब लिंग खडा हो जाये तो उसको अंडरवेअर में ऊपर की ओर कर लीजिये,
देसी घी/नारियल का तेल/फेस क्रीम में से किसी की मालिश लिंग पर हलके हाथों से कीजिये और हाथ का मूवमेंट लिंग के जड़ से सुपाडे की ओर होना चाहिए.
अपने मन को सुदृढ़ कीजिये, ओर विचार कीजिये कि आपको अभी नहीं हो रहा है. कुछदेर ओर लगेगी......
सुपाडे को सूखा मत रहने दीजिये, इस पर ऊपर लिखे चिकनाई में से कोई सी लगाकर चिकनाई बना कर रखिये.
देखिये कि आप खुद के साथ क्या कमाल कर पाते हैं?
दिन भर में १५ से २० गिलास पानी पीजिये,और कब्ज मत रहने दीजिये
जल्दी उत्तेजित मत होइए, एवं जब लिंग खडा हो जाये तो उसको अंडरवेअर में ऊपर की ओर कर लीजिये,
अपने मन को दूसरी और मोड़ लीजिये ताकि उत्तेजना का असर कम हो जाए
एक बार लिंग के खडा होने के बाद कुछ देरको सेक्स क्रिया से दूर हो जाइए, इस तरहसे जब लिंग बैठ कर फिर खडा होगा तो स्खलन का समय बढ़ जायेगा.
शीघ्रपतन की हकीकत
सेक्स क्रिया में मानवों के बीच शीघ्रपतन नामक शब्द काफी अहमियत रखता है. यदि इस शब्द की शाब्दिक व्याख्या करें तो शीघ्र गिर जाने को शीघ्रपतन कहते हैं। लेकिन सेक्स के मामले में यहशब्द वीर्य के स्खलन के लिए, प्रयोग किया जाता है। पुरुष की इच्छा के विरुद्ध उसका वीर्य अचानक स्खलित हो जाए, स्त्री सहवास करते हुए संभोग शुरूकरते ही वीर्यपात हो जाए और पुरुष रोकना चाहकर भी वीर्यपात होना रोक न सके, अधबीच में अचानक ही स्त्री को संतुष्टि व तृप्ति प्राप्त होने से पहले ही पुरुष का वीर्य स्खलित हो जानाया निकल जाना, इसे शीघ्रपतन होना कहते हैं। इस व्याधि का संबंध स्त्री से नहीं होता (क्योंकि स्त्रियों में स्खलन की क्रिया नहीं पायी जाती), यह पुरुष से ही होता है और यह व्याधि सिर्फ पुरुष को ही होती है। शीघ्र पतन की सबसे खराब स्थिति यह होती है कि सम्भोग क्रिया शुरू होते ही या होने सेपहले ही वीर्यपात हो जाता है। सम्भोग की समयावधि कितनी होनी चाहिए यानी कितनी देर तक वीर्यपात नहीं होना चाहिए, इसका कोई निश्चित मापदण्ड नहीं है। यह प्रत्येक व्यक्ति की मानसिक एवं शारीरिक स्थिति पर निर्भर होता है। वीर्यपात की अवधि स्तम्भनशक्ति परनिर्भर होती है और स्तम्भन शक्ति वीर्य के गाढ़ेपन और यौनांग की शक्ति पर निर्भर होती है। स्तम्भन शक्ति का अभाव होना शीघ्रपतन है। बार-बार कामाग्नि की आंच (उष्णता) के प्रभाव सेवीर्य पतला पड़ जाता है सो जल्दी निकल पड़ता है। ऐसी स्थिति में कामोत्तेजनाका दबाव यौनांग सहन नहीं कर पाता और उत्तेजित होते ही वीर्यपात कर देता है। यह तो हुआ शारीरिक कारण, अब दूसरा कारण मानसिक होता है जो शीघ्रपतन की सबसे बड़ी वजह पाई गई है। एक और लेकिन कमजोर वजह और है वह है हस्तमैथुन. हस्तमैथुन करने वाला जल्दी से जल्दी वीर्यपात करके कामोत्तेजना को शान्त कर हलका होना चाहता है और यह शान्ति पा कर ही वह हलकेपन तथा क्षणिक आनन्द का अनुभव करता है। इसके अलावा अनियमित सम्भोग, अप्राकृतिक तरीके से वीर्यनाशव अनियमित खान-पान आदि।
शीघ्रपतन की बीमारी को नपुंसकता श्रेणी में नहीं रखा जा सकता, क्योंकि यह बीमारी पुरुषों की मानसिक हालत पर भी निर्भर रहती है। मूलरूप से देखा जायतो 95 फीसदी शीघ्रपतन के मामले मानसिकहालत की वजह से होते हैं और इसके पीछे उनमें पाई जाने वाली सेक्स अज्ञानता व शीघ्रपतन को बीमारी व शीघ्रपतन से संबंधी बिज्ञापन होते हैं. कई बार तो इन विज्ञापनों से वीर्य स्खलन का समय इतना अधिक बता दिया जाता है जो मानव शक्ति से काफी परे होता है मसलन 20 मिनट से आधे घंटे तो कई बार इससे भी ज्यादा जबकि वर्तमान शोधों से पता चला है स्खलन का सामान्य समय तीन से चार मिनट का होता है.
कई युवकों और पुरुषों को मूत्र के पहलेया बाद में तथा शौच के लिए जोर लगाने परधातु स्राव होता है या चिकने पानी जैसापदार्थ किलता है, जिसमें चाशनी के तार की तरह लंबे तार बनते हैं। यह मूत्र प्रसेक पाश्वकीय ग्रंथि से निकलने वाला लसीला द्रव होता है, जो कामुक चिंतन करने पर बूंद-बूंद करके मूत्र मार्ग और स्त्री के योनि मार्ग से निकलता है, ताकि इन अंगों को चिकना कर सके। इसका एक ही इलाज है कि कामुकता और कामुक चिंतन कतई न करें। एक बात और पेशाब करते समय, पेशाब के साथ, पहले या बीच में चूने जैसा सफेद पदार्थ निकलता दिखाई देता है, वह वीर्य नहीं होता, बल्कि फास्फेट नामक एक तत्व होता है, जो अपच के कारण मूत्र मार्ग से निकलता है, पाचन क्रिया ठीक हो जाने व कब्ज खत्म हो जाने पर यह दिखाई नहीं देता है। धातु क्षीणता आज के अधिकांश युवकों की ज्वलंत समस्या है। कामुक विचार, कामुक चिंतन, कामुक हाव-भाव और कामुक क्रीड़ा करने के अलावा खट्टे, चटपटे, तेज मिर्च-मसाले वाले पदार्थों का अति सेवन करने से शरीर में कामाग्निबनी रहती है, जिससे शुक्र धातु पतली होकर क्षीण होने लगती है।
दरअसल सेक्स के दौरान शीघ्रपतन होना एक सामान्य समस्या है। यह समस्या अधिकांशत: युवाओं के बीच कहते-सुनते देखा जा सकता है। एक अमेरिकी सर्वे के
अनुसार दुनिया की 43 फीसदी महिलाएं और31 प्रतिशत पुरूष शीघ्रपतन की समस्या के शिकार हैं। हालांकि यह समस्या गर्भधारण या जनन के लिए बाधा उत्पन्न नहीं करती है, फिर भी यह एक स्वस्थ शरीरऔर अच्छे व्यक्ितत्व के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकता है।इस समस्या से ग्रसित व्यक् ित के स्वभाव में सबसे पहले परिवर्तन आता है। आमतौर पर यह देखा जाता है कि इस परेशानी की वजह से पीडि़त व्यक्ित का स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है। वह अक्सर सिरदर्द जैसे शारीरिक समस्याओं से भी ग्रसित हो सकता है या कुछ समय के बाद सेक्स में अरूचि भी आ जाने की संभावना रहती है। इसके अलावा शारीरिक दुर्बलता भी हो सकती है।आज भी बहुत से लोग इस समस्या को गंभीरता से नहीं लेते हैं। जो लेते भी हैं वह इस समस्या को किसी के सामने रखने से डरते हैं। एक आकलन के अनुसार पुरूष का संभोग समय औसतन तीन मिनट का होता है। कुछ लोग दस मिनट तक संभोगरत रहने के बाद खुद को इस समस्या से बाहर मानते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है। इसके बरक्स अगर आप एक दूसरे को संतुष्ट करनेसे पहले ही स्खलित हो जाते हैं तो यह शीघ्रपतन माना जाता है। यह समस्या असाध्य नहीं है। लेकिन दुर्भाग्य से इसके उपचार को लेकर लोगों में अनेक तरहकी भ्रांतियां फैली हुई हैं। जबकि सेक्स के कुछ तरीकों में परिवर्तन करके इस समस्या से निजात पाया जा सकता है। सबसे पहले तो इस समस्या को भी एक आमशारीरिक परेशानी की तरह लें।
सेक्स के दौरान चरम पर आने से पहले सेक्स के विधियों में बदलाव करें। मसलन आप मुखमैथुन, गुदामैथुन आदि की ओररूख कर सकते हैं। इसके बाद भी अपनी अवस्थाओं को बदलते रहने का प्रयास करते रहें। सेक्स के दौरान कुछ देर तक लंबी सांस जरूर लें। यह प्रक्रिया शरीर को अतिरिक्त ऊर्जा प्रदान करती है। आपको मालूम होना चाहिए कि एक बार के सेक्स में करीब 400 से 500 कैलोरी तक ऊर्जा की खपत होती है। इसलिए अगर संभव हो सके तो बीच-बीच में त्वरित ऊर्जा देने वाले तरल पदार्थ जैसे ग्लूकोज, जूस, दूध आदि का सेवन कर सकते हैं। इसके अलावा आपसी बातचीत भी आपको स्थायित्व दे सकता है। ध्यान रखें, संभोग के दौरान इशारे में बात न करके सहज रूप से बात करें।डर, असुरक्षा, छुपकर सेक्स, शारीरिक व मानसिक परेशानी भी इस समस्या का एक कारण हो सकती है। इसलिए इससे बचने का प्रयत्न करें। इसके अलावे कंडोम का इस्तेमाल भी इस समस्या के निजात के लिए सहायक हो सकता है। समस्या के गंभीर होने पर आप किसी अच्छे सेक्सोलॉजिस्ट से सलाह ले सकते हैं।
शीघ्रपतन से बचाव का सबसे बेहतर तरीका है कि आप अपने दिमाग से यह निकाल दें किआप शीघ्रपतन के शिकार हैं और शीघ्रपतन कोई बीमारी है. शुरुआती दौर में अस्सी फीसदी लोग संभोग के दौरान शीघ्रपतन का शिकार होते है. इसलिये इसे बीमारी के रूप में न लें न ही विज्ञापनों से भ्रमित
कुछ आजमाए हुए उपाय
शीघ्रपतन से बचने के लिए आजमाया हुआ नुस्खा:
१. सम्भोग ( योनि में लिंग प्रवेश करने से पहले ) जम कर पूर्व क्रीडा (fore play) करें. रति क्रीडा और सम्भोग में ६०:४० का अनुपात रखें.
२. जब स्त्री सम्भोग को तैयार हो जाए , तो लिंग को योनि में प्रवेश करें और एक ५ सेकंड तक रुक जाएँ. तब धीरे धीरे योनिमें लिंग को चलायें जिस से योनि सहज हो जाए.
३. स्त्री को अपने ऊपर सवार कर योनि मेंलिंग डलवा ले और उस से धक्के लगाने को कहें . बीच बीच में उस के स्तन चूमते रहे और दबाते रहे. इस अवस्था में स्त्री जल्दी ही स्खलित हो जायेगी.
४. स्त्री के स्खलित होने के बाद स्त्री को नीचे लेटा कर योनि में लिंग चलायें और अपना वीर्यपात कर लें .
कुछ अन्य टिप्स :
* जब सम्भोग करना हो तभी सम्भोग के बारे में सोचे.
* कई दिन बाद सम्भोग कर रहें हों तो ३-४घंटे पहले एक मुठ मार लें.
* सम्भोग हमेशा तसल्ली से करें. जल्दी, थके हुए होने पर या पूरी निजता न हो न पर न करें.
ये बहुत सही बात है की शीघ्रपतन एक शारीरिक समस्या नहीं बल्कि एक मानसिक समस्या है. परन्तु एक बात हमें नहीं भूलनी चाहिए की मानसिक स्वास्थय tabhiबेहतर होगा जब हमारा शरीर स्वस्थ होगा.इस समुदाय में बहुत कुछ सम्बोघ, श्रीघपतनतन इत्यादि लिखा जा चुका है जिससे मै भी सहमत हूँ. इस सार में मै कुछ भोजन और व्यायाम से जुडी बातो को रखना चाहूँगा. यदि पसंद आये तो जरूर बताइए -
[१] रात को १०-११ बजे के बीच सोने से शरीर में "ग्रोव्थ हॉर्मोन" का बहाव एक ऐसे बिंदु पर पहुँच जाता है जब आपका शरीर आपके खाए हुए भोजन से प्राप्त पोषण को शरीर और मस्तिष्क के विकास के लिए लगान शुरू कर देता है. सुनिश्चित करे की आप देर रात तक जागे नहीं क्योंकि रात सोने के लिए बनी है. आप अगरसमय पर सो जाते है तो आपका शरीर और आपकामस्तिष्क दोनों को आराम मिलेगा और सुबह आप अपने आप को ताजगी से परिपूर्ण पाएंगे.
[२] सुबह सुबह जागने पे कोई नशा न करे. याद रखे सुबह कोई भी नशा करने से उस दिनऔर नशा करने की इच्क्षा बढ़ जाती है (यह एक वैज्ञानिक सत्य है). किसी भी प्रकार का नशा चाहे वो सिगेरेत्ते, तम्बाकू, शराब का हो, वह नसों को शिथिल कर देता है. यहाँ पर यह भी बताना जरूरी hai की नसों की क्रयाप्रदाली में कोई बाधा आये तो लिंग के तनाव में कमी आ सकती है क्योंकि लिंग तभी तनाव में आताहै जब खून का बहाव पूरी तरह से हो. अब जबकि कोई नशा करेगा तो वह नशीला रसायन मस्तिष्क में उपस्थित एक "डोपामिन" नामक प्रापक को उत्तेजित karega की वहमस्तिष्क को सन्देश भेजे की"अद्रेनेलिने" नामक हॉर्मोन जो ख़ुशी और शिथिलता का हॉर्मोन है वो शरीर में बहाए ताकि उस व्यक्ति को ख़ुशी का अनुभव हो. इस ख़ुशी के लिए आप अपना और अपनी पत्नी की खुशियों की तिलांजलि क्यों देना चाहते है. कोई नशा न करे चाहे सुबह हो या शाम.
[३] अब बात करे आहार की. आज सभी अच्छे कपडे पहनना, बड़ी गाडी में घूमना, बड़ा घर, नया मोबाइल जेब में रखना चाहते है. जाहिर सी बात है इसके लिए बहुत पैसा chahiye होगा. पैसे के लिया सभी आज कल"चूहा दौड़" लगा रहे है. पैसा बहुत जरूरी लेकिन उस पैसे का क्या मतलब जो चैन से और पौष्टिक आहार भी काने का
का समय एवं अवसर न दे पाए. याद रखे संतुलित भोजन बिना आप सम्बोघ का आनंद नहीं ले पाएंगे. क्योंकि भोजन ही आपकी रस,मज्जा,धातु की पुष्टि करता है.
[४] सुबह का नाश्ता जिसे हम ब्रेकfast भी कहते है, वह पोषक तत्वों से परिपूर्ण होना चाहिए. यदि मान लिया जाये की हम रात को १० बजे सो जाते है औरसुबह ८-९ बजे भोजन करते है, तब सोचिये १०-११ गनते का फासला होता है २ भोजन के बीच में. अब यदि पोषक तत्वों से परिपूर्ण भोजन ना किया जाये तो शरीर गठन और मन pathn laayak कैसे रहेगा. इसीलिए सुबह का भोजन पोषक तत्वों से परिपूर्ण होना ही चाहिए. सुबह के भोजन में - oatmeal, दूध, दही, फल, साबुत अनाज, रोटी, सब्जी (कम तेल में) इत्यादिलिया जा सकता है. हा एक बात और जब आप सो कर उठे तब १-२ गिलास पानी पी ले. पानी पीने से शौच खुल कर होता है. यदि पेट साफ़ और खली है तो मर और मस्तिष्क भी प्रस्सन रहेंगे.
[५] दोपरह के भोजन में aap दही, दाल, सलाद, सूप, चावल, सब्जी, mattha आदि का सेवन कर सकते है. ये पाचन तंत्र को सुव्यवस्थित रखेगा. याद रखे पानी कभी भी खाने के बीच में नहीं पीना चाहिए.
पानी भोजन ख़तम करने के १५-२० mint बाद ही पीना चाहिए. इन में कम से कम १२-१५ गिलास पानी जरूर पीना चाहिए.इससेशरीर का तापमान और पाचन दुरुष्ट रहता है.
[६] शाम को एक फल या सूप लिया जा सकता है.
[७] रात्री के भोजन में कुछ हल्का ही कहिये जैसे रोटी, सब्जी, दाल इत्द्यादी. अक्सर होता ये है लोग रात को खूब थूश-थूश का का लेते है और सुबह हल्का खा लेते है. जैसा की सूत्र ४ में बताया गया है की सुबह का भोजन संतुलित और पोषक तत्वों से परिपूर्ण होना चाहिए. इसके विपरीत रात्रि का भोजन हल्का होना चाहिए क्योंकि रात्रि में आप भोजन के बाद सोने चले जायेंगे और थूश-थूश कर खाने की वजह से वह भोजन ka एक बड़ा भाग चर्बी बन जायेगा जो की एक अच्छी baat नहीं होगी.
आगले अंक में जो की श्रीघ ही प्रकाशित किया जायेगा और जानकारिया दी जानेंगी जैसे -
[१] सेक्स के लिए उत्तम भोजन
[२] शीघ्रपतन को दीर्घपतन में बदलने कातरीका.
[३] उत्तम सेक्स हेतु शरीरिक व्यायाम.
[४] और बहुत कुछ...