भारतीय संस्कृति
भारत की संस्कृति कई चीज़ों को मिला जुलाकर बनती है जिसमें भारत का लम्बा इतिहास, विलक्षण भूगोल और सिन्धु घाटी की सभ्यता के दौरान बनी और आगे चलकर वैदिक युग में विकसित हुई, बौद्ध धर्म एवं स्वर्ण युग की शुरुआत और उसके अस्तगमन के साथ फली फूली अपनी खुद की प्राचीन विरासत शामिल हैं। इसके साथ ही पडोसी देशों के रिवाज़, परम्पराओं और विचारों का भी इसमें समावेश है. पिछले पाँच सहस्राब्दियों से अधिक समय से भारत के रीति रिवाज , भाषाएं , प्रथाएं और परंपराएं इसकी एक दुसरे से परस्पर संबंधों में महान विविधताओं का एक अद्वितीय उदाहरण देती हैं भारत कई धार्मिक प्रणाली (religious systems), जैसे की हिन्दू धर्म, जैन धर्म , बौद्ध धर्म, और सिख धर्म जैसे धर्मों की जननी है इस मिश्रण से भारत में उत्त्पन्न हुए विभिन्न धर्म और परम्पराओं (traditions) ने विश्व के अलग - अलग हिस्सों को भी काफी प्रभावित किया है
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भारतीय संस्कृति की महत्ता
भारतीय संस्कृति विश्व के इतिहास में कई दृष्टियों से विशेष महत्त्व रखती है।
यह संसार की प्राचीनतम संस्कृतियों में से है। मोहनजोदड़ो की खुदाई के बाद से यह मिस्र, मेसोपोटेमिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं के समकालीन समझी जाने लगी है।
प्राचीनता के साथ इसकी दूसरी विशेषता अमरता है। चीनी संस्कृति के अतिरिक्त पुरानी दुनिया की अन्य सभी - मेसोपोटेमिया की सुमेरियन, असीरियन, बेबीलोनियन और खाल्दी प्रभृति तथा मिस्र ईरान, यूनान और रोम की-संस्कृतियाँ काल के कराल गाल में समा चुकी हैं, कुछ ध्वंसावशेष ही उनकी गौरव-गाथा गाने के लिए बचे हैं; किन्तु भारतीय संस्कृति कई हजार वर्ष तक काल के क्रूर थपेड़ों को खाती हुई आज तक जीवित है।
उसकी तीसरी विशेषता उसका जगद्गुरु होना है। उसे इस बात का श्रेय प्राप्त है कि उसने न केवल महाद्वीप-सरीखे भारतवर्ष को सभ्यता का पाठ पढ़ाया, अपितु भारत के बाहर बड़े हिस्से की जंगली जातियों को सभ्य बनाया, साइबेरिया के सिंहल (श्रीलंका) तक और मैडीगास्कर टापू, ईरान तथा अफगानिस्तान से प्रशांत महासागर के बोर्नियो, बाली के द्वीपों तक के विशाल भू-खण्ड पर अपना अमिट प्रभाव छोड़ा।
संस्कृति
सर्वांगीणता, विशालता, उदारता और सहिष्णुता की दृष्टि से अन्य संस्कृति
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भाषा
साँचा:Main article भारत में बोली जाने वाली भाषाओँ की बड़ी संख्या ने यहाँ की संस्कृति और पारंपरिक विविधता को बढ़ाया है. १००० (यदि आप प्रादेशिक बोलियों और प्रादेशिक शब्दों को गिनें तो, जबकि यदि आप उन्हें नहीं गिनते हैं तो ये संख्या घट कर २१६ रह जाती है) भाषाएँ ऐसी हैं जिन्हें १०,००० से ज्यादा लोगों के समूह द्वारा द्वारा बोला जाता है, जबकि कई ऐसी भाषाएँ भी हैं जिन्हें १०,००० से कम लोग ही बोलते है.भारत में कुल मिलाकर ४१५ भाषाएं उपयोग में हैं भारतीय संविधान ने संघ सरकार के संचार के लिए हिंदी और अंग्रेजी, इन दो भाषाओं के इस्तेमाल को आधिकारिक भाषा (official language) घोषित किया है व्यक्तिगत राज्यों के उनके अपने आतंरिक संचार के लिए उनकी अपनी राज्य भाषा (state's language) का इस्तेमाल किया जाता है भारत में दो प्रमुख भाषा सम्बन्धी परिवार हैं - भारतीय-आर्य भाषाएं और द्रविण भाषाएँ, इनमें से पहला भाषा के परिवार मुख्यतः भारत के उत्तरी (northern), पश्चिमी (western), मध्य (central) और पूर्वी (eastern) क्षेत्रों के फैला हुआ है जबकि दूसरा भाषा परिवार भारत के दक्षिणी भाग में.भारत का अगला सबसे बड़ा भाषा परिवार है एस्ट्रो-एशियाई (Austro-Asiatic) भाषा समूह, जिसमें शामिल हैं भारत के मध्य और पूर्व में बोली जाने वाली मुंडा भाषाएँ (Munda languages), उत्तरपूर्व में बोई जाने वाली खासी भाषाएँ (Khasian languages), और निकोबार द्वीप (Nicobarese languages) में बोली जाने वाली निकोबारी भाषाएँ (Nicobar Islands).भारत का चौथा सबसे बड़ा भाषा परिवार है तिब्बती- बर्मन भाषाओँ (Tibeto-Burman languages) का परिवार जो अपने आप में चीनी- तिब्बती भाषा परिवार का एक उपसमूह है.
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धर्म
धर्म जनसंख्या प्रतिशत
सभी धर्म १,०२८,६१०,३२८ १००.००%
हिन्दू ८२७,५७८,८६८ ८०.४५६%
मुसलमान १३८,१८८,२४० १३.४३४%
ईसाई २४,०८०,०१६ २.३४१%
सिख १९,२१५,७३० १.८६८%
बौद्ध ७,९५५,२०७ ०.७७३%
जैन ४,२२५,०५३ ०.४११%
अन्य ६,६३९,६२६ ०.६४५४%
धर्म नहीं कहा ७२७,५८८ ०.०७%
मुख्य लेख: भारत में धर्म
अब्राहमिक के बाद भारतीय धर्म (Indian religions) विश्व के धर्मों में प्रमुख है , जिसमें हिन्दू धर्म, बौद्ध धर्म, सिख धर्म, जैन धर्म , आदि जैसे धर्म शामिल हैं आज, हिन्दू धर्म और बौद्ध धर्म क्रमशः दुनिया में तीसरे और चौथे सबसे बड़े धर्म हैं, जिनमें लगभग १.४ बिलियन अनुयायी साथ हैं
विश्व भर में भारत में धर्मों में विभिन्नता सबसे ज्यादा है , जिनमें कुछ सबसे कट्टर धार्मिक संस्थायें और संस्कृतियाँ शामिल हैं आज भी धर्म यहाँ के ज्यादा से ज्यादा लोगों के बीच मुख्य और निश्चित भूमिका निभाता है
८०.४% से ज्यादा लोगों का धर्म हिन्दू धर्म है कुल भारतीय जनसँख्या का १३.४% हिस्सा इस्लाम धर्म को मानता है[१] सिख धर्म , जैन धर्म और खासकर के बौद्ध धर्म का केवल भारत में नहीं बल्कि पुरे विश्व भर में प्रभाव है ईसाई धर्म, पारसी धर्म, यहूदी और बहाई विश्वास (Bahá'í Faith) भी प्रभावशाली हैं लेकिन उनकी संख्या कम है भारतीय जीवन में धर्म की मज़बूत भूमिका के बावजूद नास्तिकता और अज्ञेयवादीओं (agnostic) का भी प्रभाव दिखाई देता है
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समाज
[संपादित करें] समीक्षा
यूजीन एम. मकर के अनुसार, भारतीय पारंपरिक संस्कृति अपेक्षाकृत कठोर सामाजिक पदानुक्रम द्वारा परिभाषित किया गया हैउन्होंने यह भी कहा कि बच्चों को छोटी उम्र में ही उनकी भूमिकाओं और समाज में उनके स्थान के बारे में बताते रहा जाता है[२] उनको इस बात से और बल मिलता है की और इसका मतलब यह है कि बहुत से लोग इस बात को मानते हैं की उनकी जीवन को निर्धारण करने में देवताओं और आत्माओं की ही पूरी भूमिका होती है[२] धर्म विभाजित संस्कृति जैसे कई मतभेद.[२]जबकि, इनसे कहीं ज्यादा शक्तिशाली विभाजन है हिन्दू परंपरा में मान्य अप्रदूषित और प्रदूषित व्यवसायों का.[२]सख्त सामाजिक अमान्य लोग इन हजारों लोगों के समूह को नियंत्रित नियंत्रित करते हैं[२] हाल के वर्षों, खासकर शहरों में, इनमें से कुछ श्रेणी धुंधली पड़ गई हैं और कुछ घायब हो गई हैं[२] एकल परिवार (Nuclear family) भारतीय संस्कृति के लिए केंद्रीय है.महत्वपूर्ण पारिवारिक सम्बन्ध उतनी दूर तक होते हैं जहाँ तक समान गोत्र (gotra) के सदस्य हैं, गोत्र हिन्दू धर्मं के अनुसार पैतृक यानि पिता की ओर से मिले कुटुंब या पंथ के अनुसार निर्धारित होता है जो की जन्म के साथ ही तय हो जाता है.[२]ग्रामीण क्षेत्रों में, परिवार के तीन या चार पीढ़ियों का एक ही छत के नीचे रहना आम बात है[२]वंश या धर्म प्रधान (Patriarch) प्रायः परिवार के मुद्दों को हल करता है.[२]
विकासशील देशों में, भारत अपनी निम्न स्तर की भौगोलिक और व्यावसायिक गतिशीलता की वजह से वृहद रूप से दर्शनीय है यहाँ के लोग कुछ ऐसे व्यवसाय को चुनते हैं जो उनके माता-पिता पहले से करते आ रहे हैं और कभी कभार भौगोलिक रूप से वो अपने समाज से दूर जाते हैं[३
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[संपादित करें] परिवार
साँचा:Main article
कोयम्बतूरमें होने वाली एक हिंदू विवाह समारोह
भारतीय समाज सदियों से तयशुदा शादियों (Arranged marriages) की परमपरा रही है आज भी भारतीय लोगों का एक बड़ा हिस्सा अपने माता-पिता या अन्य सम्माननीय परवार सदस्यों द्वारा तय की गई शादीयाँ ही करता है जिसमें दूल्हा-दुल्हन की सहमती भी होती है[१०] तयशुदा शादियाँ कई चीज़ों का मेल कराने के आधार पर को ध्यान में रखकर निर्धारित की जाति हैं जैसे कि उम्र, ऊंचाई, व्यक्तिगत मूल्य और पसंद, साथ ही उनके परिवारों की पृष्ठभूमि (धन, समाज में स्थान) और उनकी जाति (caste) के साथ - साथ युगल कि कुन्दलिनीय (horoscopes) अनुकूलता
भारत में शादियों को जीवन भर के लिए माना जाता है[११] और यहाँ तलक कि दर संयुक्त राष्ट्र अमेरिका कि ५०% कि तुलना में मात्र १.१% है[१२] . तय्शादियों में तलक कि दर और भी कम होती है हाल के वर्षों में तलाकदर में काफी वृद्धि हो रही है:
इस बात पर अलग अलग राय है कि इसका मतलब क्या है: पारंपरिक लोगों के लिए ये बढती हुई संख्या समाज के विघटन को प्रदर्शित करती है, जबकि आधुनिक लोगों के अनुसार इससे ये बात पता चलती है कि समाज में महिलाओं का एक नया और स्वस्थ सशक्तिकरण हो रहा है.[१३]
हालाँकि , बाल विवाह (child marriage) को १८६० में ही गैरकानूनी घोषित कर दिया गया था लेकिन भारत के कुछ हिस्सों में ये प्रथा आज भी जारी है[१४] यूनिसेफ द्वारा संसार के बच्चों की दशा के बारे में जारी रिपोर्ट " स्टेट ऑफ़ द वर्ल्ड चिल्ड्रेन -२००९" में ४७% ग्रामीण क्षेत्रों में भारतीय महिलाएं जो की २०-२४ साल की होंगी उनकी शादी को विवाह के लिए वैध १८ साल की उम्र से पहले ही कर दी जाति हैं[१५] रिपोर्ट यह भी कहा दिखाता है की विश्व में ४०% होने वाले बाल विवाह अकेले भारत में ही होते हैं[१६]
भारतीय नाम (Indian name) भिन्न प्रकार की प्रणालियों और नामकरण प्रथा (naming conventions) पर होती हैं , जो की अलग -अलग शेत्रों के अनुसार बदलती रहती हैं नाम भी धर्म और जाति से प्रभावित होती हैं और वो धर्म या महाकाव्यों से लिए जा सकते हैं भारत की आबादी अनेक प्रकार की भाषाएं बोलती हैं
समाज में नारी की भूमिका अक्सर घर के काम काज को करने की और समुदायों की नि: स्वार्थ सेवा करने का काम होता है[२] महिलाओं और महिलाओं के मुद्दों समाचारों में केवल ७-१४% ही दिखाई देते हैं[२] अधिकांश भारतीय परिवारों में, महिलाओं को उनके नाम पर संपत्ति नहीं मिलती है , और उन्हें पैतृक संपत्ति का एक हिस्सा भी नहीं मिलता है.[१७]कानून को लागू करने मे कमजोरी के कारण , महिल्लाएं आज भी ज़मीन के छोटे से टुकड़े और बहुत कम धन मे प्राप्त होता है[१८] कई परिवारों में, विशेष रूप से ग्रामीण लोगों मे, लड़कियों और महिलाओं को परिवार के भीतर पोषण भेदभाव का सामना करना पड़ता है और इसी वजह से उनमें खून की कमी की शिकायत रहती है साथ- साथ वो कुपोषित भी होती हैं[१७]
रंगोली (या कोलम) एक परंपरागत कला है जो कि भारतीय महिलाओं में बहुत लोकप्रिय हैलोकप्रिय महिला पत्रिकाएं जिनमें फेमिना (Femina) गृहशोभा (Grihshobha) , वनिता (vanita) , वूमेनस एरा , आदि शामिल हैं
[संपादित करें] पशु
गाय को चेन्नईमें स्थित आलंकृत गोप्पुरम मंदिर]] मे रंगा या चित्रित किया जाता है
इन्हें भी देखें: Animal husbandry in India एवं Sacred cow
कई भारतीयों के पास अपने मवेशी होते हैं जैसे कि गाय-बैल या भेड़
आज भी हिन्दू बहुसंख्यक देशों जैसे भारत और नेपाल में गाय के दूध का धार्मिक रस्मों में महत्वपूर्ण स्थान है.समाज में अपने इसी ऊंचे स्थान की वजह से गायें भारत के बड़े बड़े शहरों जैसे कि दिल्ली में भी व्यस्त सड़कों के पर खुले आम घूमती हैं. कुछ जगहों पर सुबह के नाश्ते के पहले इन्हें एक भोग लगाना शुभ या सौभाग्यवर्धक माना जाता है.जिन जगहों पर गोहत्या एक अपराध है वहां किसी नागरिक को गाय को मार डालने या उसे चोट पहुँचाने के लिए जेल भी हो सकती है.
गाय को खाने के विरुद्ध आदेश में एक प्रणाली विकसित हुई जिसमें सिर्फ एक जातिच्युत मनुष्य (pariah) को मृत ग्गयों को भोजन के रूप में दिया जाता और सिर्फ वाही उनके चमड़े (leather) को निकाल सकते थे. सिर्फ दो राज्यों :पश्चिम बंगाल और केरल के अतिरिक्त हर प्रान्त में गोहत्या निषेध है.हालाँकि गाय के वध के उद्देश्य से उन्हें इन राज्यों में ले जाना अवैध है लेकिन गायों को नियमित रूप से जहाज़ में सवार कर इन राज्यों में ले जाया जाता है
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मनोरंजन और खेल
मुख्य लेख: Sports in India
वार्षिक सर्प नाव दौड़ (snake boat race) का प्रदर्शन पथानामथिट्टा (Pathanamthitta) के नज़दीक अरनमुला (Aranmula) पर पम्बा नदी (Pamba River) में ओणम (Onam) उत्सव के दौरान किया जाता है.मनोरंजन और खेल के क्षेत्र में भारत में खेलों की एक बड़ी संख्या विकसित की गयी थी.आधुनिक पूर्वी मार्शल कला भारत में एक प्राचीन खेल के रूप में शुरू हुई और कुछ लोगों द्वारा ऐसा माना जाता है कि यही खेल विदेशों में प्रेषित किये गए और बाद में उन्ही खेलों का अनुकूलन और आधुनिकीकरण किया गया.ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में आये कुछ खेल यहाँ काफी लोकप्रिय हो गए जैसे फील्ड हॉकी, फुटबॉल (सॉकर) और खासकर क्रिकेट.
हालांकि फील्ड हॉकी भारत का राष्ट्रीय खेल है, मुख्य रूप से क्रिकेट भारत का सबसे लोकप्रिय खेल है, बल्कि न केवल भारत बल्कि पूरे उपमहाद्वीप (subcontinent) में ये खेल मनोरंजन और पेशेवर तौर पर फल फूल रहा है.यहाँ तक कि हाल ही में क्रिकेट को भारत और पाकिस्तान के बीच राजनयिक संबंधों के लिए एक मंच के रूप में उपयोग किया जा चुका है .दोनों देशों ने क्रिकेट टीमों सालाना एक दुसरे के आमने सामने होती हैं और ऐसी प्रतियोगिता दोनों देशो के लिए काफी जोश भरी होती है.पारंपरिक स्वदेशी खेलों में शामिल हैं कबड्डी और गिल्ली-डंडा,जो देश के अधिकांश भागों में खेला जाता है.इंडोर(घर के भीतर खेले जाने वाले) और आउटडोर ( घर के बाहर खेले जाने वाले) खेल जैसे कि शतरंज (Chess), सांप और सीढ़ी (Snakes and Ladders), ताश (Playing cards), पोलो (Polo), कैरम (Carrom), बैडमिंटन (Badminton) भी लोकप्रिय हैं.शतरंज का आविष्कार भारत में किया गया था.
भारत में ताकत और गति के खेलों बहुत समृद्ध हैं.प्राचीन भारत में वज़न , कंचे या पास के रूप में पत्थर का प्रोयोग किया जाता था.प्राचीन भारत में रथ दौड़, तीरंदाजी, घुड़सवारी, सैन्य रणनीति, कुश्ती, भारोत्तोलन, शिकार, तैराकी और दौड़ प्रतियोगिताएं होती थीं.
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[संपादित करें] टेलीविजन
मुख्य लेख: Television in India
भारतीय टेलिविज़न कि शुरुआत १९५९ में शिक्षा कार्यक्रमों के प्रसारण के परीक्षण के साथ हुई.[३५]भारतीय छोटे परदे के कार्यक्रम १९७० के मध्य में शुरू किये गए.उस समय वहां केवल एक राष्ट्रीय चैनल दूरदर्शन था, जो कि सरकार द्वारा अधिकृत था, १९८२ में भारत में नै दिल्ली एशियाई खेलों के साथ टी वी प्रोग्रामिंग में क्रांति आई, उसी वर्ष भारत में पहली बार रंगीन टी वी आये.रामायण और महाभारत कुछ लोकप्रिय टेलीविजन श्रृंखलाओं में से थे.1980 के दशक के अंतिम हिस्से तक अधिक से अधिक लोगों के पास अपने टीवी सेट हो गए थे.हालांकि चैनल एक ही था, टीवी प्रोग्रामिंग संतृप्ति पर पहुँचा चुकी थी.इसलिए सरकार ने एक अन्य चैनल खोल दिया जिसमें कुछ भाग राष्ट्रीय प्रोग्रामिंग और कुछ भाग क्षेत्रीय प्रोग्रामिंग का था.इस चैनल को डीडी २ और बाद में डीडी मेट्रो के रूप में जाना जाता था.दोनों चैनलों पृथ्वी से प्रसारित थे.
१९९१ में, सरकार ने अपने बाजार खोले और केबल टेलीविजन की शुरुआत हुई.तब से उपलब्ध चैनलों की संख्या में एक बड़ा उछाल कर आया है.आज, भारतीय सिल्वर स्क्रीन अपने आप में एक बहुत बड़ा उद्योग है, और इसमें भारत के सभी राज्यों के हजारों कार्यक्रम है.छोटे परदे ने कई सिलेब्रिटी यानि मशहूर हस्तियों को जन्म दिया है और उनमें से कुछ आज अपने लिए राष्ट्रीय ख्याति अर्जित कर चुके हैं.कामकाजी महिलाओं, और यहाँ तक की सभी प्रकार के पुरुषों में भी टी वि धारावाहिक बेहद लोकप्रिय हैं.छोटे परदे पर काम करने वाले कुछ अभिनेताओं ने बॉलीवुड में भी अच्छी जगह बनाई है.भारतीय टीवी, पश्चिमी टीवी की तरह ही विकसित हो चूका है और यहाँ भी कार्टून नेटवर्क, निकेलोदियन, एमटीवी इंडिया जैसे स्टेशन आते हैं.
इन्हें भी देखें: List of Indian television stations
[संपादित करें] सिनेमा
मुख्य लेख: Cinema of India
एक बॉलीवुड डांस नंबर की शूटिंगबॉलीवुड, मुम्बई स्थित भारत के लोकप्रिय फिल्म उद्योग का अनौपचारिक नाम है.बॉलीवुड और अन्य प्रमुख सिनेमाई केन्द्रों (बंगाली, कन्नड़, मलयालम, मराठी, तमिल, तेलुगु (Telugu)) को मिलाकर व्यापक भारतीय फिल्म उद्योग का गठन होता है . सबसे ज्यादा संख्या में फिल्मों के निर्माण और बेचे गए टिकटों की सबसे बड़ी संख्या के आधार पर इसका उत्पादन दुनिया में सबसे ज्यादा माना जाता है.
व्यावसायिक फिल्मों के अलावा, भारत में भी समीक्षकों द्वारा बहुप्रशंसित सिनेमा का निर्माण हुआ है. जैसे की सत्यजीत रे, ऋत्विक घटक (Ritwik Ghatak), गुरु दत्त (Guru Dutt), के.एच. विश्वनाथ (K. Vishwanath), अदूर गोपालकृष्णन (Adoor Gopalakrishnan), गिरीश कासरवल्ली (Girish Kasaravalli), शेखर कपूर (Shekhar Kapoor), ऋषिकेश मुखर्जी, शंकर नाग (Shankar Nag), गिरीश कर्नाड, जी वी अय्यर (G. V. Iyer) जैसे निर्माताओं द्वारा बनाई गयी फिल्में.भारतीय फिल्म निर्देशक (Indian film directors), देखें )दरअसल, हाल के वर्षों में अर्थव्यवस्था के खुलने और विश्व सिनेमा की झलक मिलने से दर्शकों की पसंद बदल गयी है.इसके अलावा, अधिकांश शहरों में मल्टीप्लेक्स के तेजी से बढे है जिससे , राजस्व का स्वरूप भी बदलने लगा है.
[संपादित करें] रेडियो
मुंबई में फॉक्सहंट पर अप्रवीण रेडियो ऑपरेटर.भारत में रेडियो प्रसारण १९२७ में, निजी स्वामित्व के दो ट्रांसमीटरों (transmitter) द्वारा बॉम्बे और कोलकाता में शुरू हुआ.१९३० में इनका राष्ट्रीयकारन किया गया और १९३६ तक इन्होने "भारतीय प्रसारण सेवा" नाम से काम किया. १९३६ में इनका नाम बदल कर, ऑल इंडिया रेडियो (एआईआर) कर दिया गया.यद्यपि १९५७ में आधिकारिक तौर पर इसका नाम बदल कर आकाशवाणी कर दिया गया लेकिन आज भी यह ऑल इंडिया रेडियो के नाम से लोकप्रिय है. ऑल इंडिया रेडियो प्रसार भारती (ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया) का एक अंग है.जो कि सूचना और प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार की एक स्वायत्त संस्था है.यह प्रसार भारती के राष्ट्रीय टेलीविजन प्रसारणकर्ता दूरदर्शन की एक सहयोगी संस्था है. २० वीं शताब्दी के अंत के बाद से भारत में रेडियो आवृत्तियों एफ एम् और ए एम् बैंड को निजी क्षेत्र के प्रसारणकर्ताओं के लिए खोला दिया गया है लेकिन ऐसी सेवा ज्यादातर महानगरीय क्षेत्रों तक ही सीमित है .मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई, हैदराबाद, बंगलौर जैसे शहरों में कई एनी निजी एफ एम् चैनल लोकप्रिय हिंदी और अंग्रेजी संगीत प्रसारित करते हैं, हालाँकि उन आकाशवाणी की तरह समाचार प्रसारित करने का अधिकार नहीं है. हाल ही में वर्ल्ड स्पेस (World Space) ने देश की पहली उपग्रह रेडियो सेवा का शुभारंभ किया.
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