ROUSTEACHER.
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11वी शताबदि भारतदेश मेँ बुदेँलखँड के राजा चँन्देला के समय मेँ सबसे अघिक ROUSTEACHERS थीँ !
ROUSTEACHER मतलब जिसकी कल्पना शायद हर पुरुष करता है । ऐसी औरत जिसमे आदँशपत्नी, उमदामाँ, प्यारीबहन और उतम मित्र सभी के गुण हो । ROUSTEACHER प्रियपुरुष को खुश रखने मे माहीर थीँ वोँ खुद की हर बात मनवानेँ मेँ निपुणँ थीँ ।
ROUSTEACHER औरतो मे बहूत अघिक कामुकता होती थी ।
औरतो को मँदो से कमजोर माना जाता है लेकिन हमारे शास्त्र मेँ लिखा हैँ के SEX समय वही औरतो मेँ मँदो से 4 गुना अघिक कामुकता और ताकत होती हैँ ।
उनहे अपने प्रिय पुरुष को अपने नियंत्रण मेँ रखना अरछा लगता था । जिसके लिये वो समागम के दरम्यान अपने पति या अपने प्रेमी को प्रबलता से बिना कोई संकोच बाँह मेँ उठाके या गोड मे बिठाके उनहे प्यार करती थी । हमे लगता है के 21 वी शताबदी की औरते स्वतंत्र आधुनीक हैँ लेकिन 11वी शताबदी कि ROUSTEACHERS के मुकाबले मे आज की औरते बहूत पीछे हैँ ।
वँतमान समय की औरते यहा दीखायी गइ समागम पूँवे की मुकत कामक्रिडा शायद भुला चुकी हैँ जो कामुकत खेलो सेँ ROUSTEACHER पुरुष को पूँणत: उतेजित कर लेती थी और अपनी हरकतो से पुरुष को हर बात मनवा के खुद भी सँतुष्ट होती थी । शायद यही कारण तभी औरते जातिय जीवन मेँ ज्यादा सँतुष्ट सुखी थी । वँतमानकाल मेँ शायद ऐसी औरतो की संखया 50% भी नहीँ जो समागम मेँ पुणँ तौर से मुकत और पुरुषोसे पूणँ तरह से सँतुष्ट होँ । 11वी शदी मे भारत सहित पूर्विय देशो मेँ SEX को CHEAP नही बलकि ऐक ART कला माना जाता था । तभी औरते समागम पूँव विविघ आसनो क्रियाऔ मेँ मँदो से ज्यादा उतसुक थीँ । और वोँ खासतौर सेँ ये कामक्रिडा अपने पुरुषमित्र, अपनी सहेलीयो, पती, प्रेमी के साथ अपनी ईरछा अनुसार व्यव्हार से कर शकती थीँ ।
औरत को मँद से कमजोर प्रँदशित नहि किया जाता था तभी औरते समागम के लिये पहेल और क्रियाये खुद संचालित कर शकती थीँ
मँदोँ को भी औरतो की गोद मेँ बैठने मे या उनकी बाहोँ मेँ होनेमे कोई शँम महेसुश नही होती थी
12वी शँताबदी मेँ बनी हुई खजुराह के शिल्प भी शायद यह ईतिहास बया करते हैँ ।
तबके मँद औरत निसंकोच आज के पुरुष औरतो से ज्यादा कामुकत और कामशास्र मेँ पारंगत होँगे ।
11वी 12वी सदी आजकी 21वी सदी कि तरह शायद र्सिफ पुरुषप्रघान नही थीं, जिसमेँ समागम पूँव कि सभी कामक्रिङा र्सिफ पुरुषो के नियंत्रण मे रहेती हैँ ।
तभी पुरुष और स्री वास्तविक तौर से समक्क्ष थेँ । ऐक दुसरे के समाघीन थेँ ।
पाँदशिकता से देखे तो औरत और मँद मे आज के समय मे भी संभाग पूँव वो सामानता नही हैँ जो उस वकत थी ।
शायद 13वी 14वी शदी मेँ मुगलो और दुसरे कई विदेशी हमलो के कारण हमारी यह भारतिय स्वतँत्रता खो गई ।
और 18वी शदी के अंग्रेजो के दौँर मे औरत-मँद का फासला इतना बठ गया के औरतै जैसे SEX मे पुरुषो का खिलोना बन गई ।
ये बात अलग है कि बाद मे अंग्रेजो ने हमारी पुरानी संस्कृति देख औरतो को SEX मे स्वतँत्रता समानता दे के अपनी गलती को भाप लिया ।
20वी शदी के अंततक औरते जैसे घुँघट के अँदर और घर कि चार दीवारो मे दब गई ।
स्वतँत्रता छिन जाने के कारण आजकी औरते SEX मे शरम संकोच महेसुश करती हैँ इसी लिये वो पहेले कि तरह पति प्रेमी को उठाके मुकत अभीगम से प्यार करते नही दिखती है कयोकी औरते अब खुद को ईस काबील नही समजती के वो भी पुरुषो कि समकक्ष है ।
पर जैसे कोई भी चीज कायम नही वैसे समय भी पुथ्वी की तरह गोल गोल गुमफिर के वापस ऐक ही जगह आता हैँ ।
अब फिर बदलते वकत के चलते देँखाजाता है के वापस औरते फिर से ROUSTEACHER जैसी स्वतँत्रता कि और बढ रही हैँ ।
INTERNET के माघ्यम से ज्यादातर देखा जा शकता हैँ के अब समाज फिर से KAMASUTRA कि 11वी शताबदी जैसा समान स्वतँत्र और पुरुष औरत का मुकत व्यवहार चाहता हैँ औरते भी अपनी इरछा अनुसार पुरुषो को अपनी गोँद मे या बाँह मेँ उठा के निसंकोच प्यार कर शकती हैँ ।
अब शायद पुरुषप्रघान समाज को भी ऐहसास होँ रहा हैँ की ऐसी समानता स्वतँत्रता मेँ कोई शँम या अहंम महेसुस नही करना चाहीये और बँघनो से मुकत प्यार मे ही सच्चा आंनद मिलता हैँ ।
11वी सुवँण शँताबदी बाद आज हम फिर बदलते समय के साथ ROUSTEACHER औरतो का आदर और सनमान करते हैँ । ताकि खुद को कमजोर मानने वाली औरते और संकुचित मानस रखने वाले मँद जयादा आसानी से ये बात समज शकेँ ।