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कुछ कामुकत किस्से - sexyhindistory



कुछ कामुकत किस्से
मेरा पहेला प्यार
स्विती मेरे बाजु के फलेट मेँ रहेने आई दिखने मे वो ऐकदम सरल और नाजुक थी लेकिन बहुत ही गुस्से वाली लगती थी ।
ऐक दिन हमारे ऐरीया की सारी लाईटे चली गई बाजु मे उसके घर मे भी लाईट नही थी । वह हमारे घर केन्डल लेने को आई जब केन्डल की घुघली रोशनी मे मैँने उसे पहेली बार नजदीकी से देँखा ।
वो लोँग नये घर मे हाल मे ही शिफट हुऐ थे हमारी जान पहचान नही हुई थी । अघेँरे मे वोँ मेरे ऐकदम करीब खडी थीँ मेरी 6 फुट हाईट के सामने वोँ करीबन मेरे काँघे तक की हीँ पहुचती थी ।
पास से गुजरते वकत अंघेँरे मेँ मेरा पाव उसके पाव के उपर पड गया और मेँ उसके उपर गीर गया मेरा पुरा वजन उसके उपर आ गया उसके मुहँ से ऐक चिख सी नीकल गई " आ.उ..उ..च "
मेने फोरन उपर खडे होते हूऐ उसे सोरी कहा तभी वो बोली " अँघेरे मे देँखाई नही देँता ईसी लियेँ चलो माफ किया वरनाँ.. .."
बोलते बोलते वो अटक गई उसकि आवाज मे जैसे ऐक अजिब सी गरमाहत थी मेँने देँखा गुस्से से वो मुजे गुरह रही थीँ । "कया.. वरना, कया.. मेडम मेने जानबुज के तुमारे पैँर पे पैँर रखके तुमे चोँट नही दीँ "
मेरा फोरन जवाब सुन के उसके चहेरे से वो गुस्सा गायब हो गया " वरना कुछ नहीँ " थोडा मुशकुरा के वो दबेँ पाव चली गई ।
ये मेरी स्विती से पहेली मुलाकात थी । ऐक दीन उसकि छोटी बहन आशा को मैँने कहा तुमारी बडी बहन स्विती बहुत गुस्सेवाली और पागल लगती हैँ
" दीखने मे तो स्विती हवा मे उड जाये ऐसी कमजोर दीखती हैँ, और बाते ऐसे करती है जैसे कँचा खाँ जायेगी "
आशा ने ये बात उसकी बडी बहन स्विती को बोलदीँ और शाम को मेने देखा वो मेरे घर के बाहर ही मेरी राह देख रही थीँ । काँघे पर हाथ और चहेरे पर गुस्सा था मे समज गया ये मेरे पे अभी भडकेगीँ
मेने उसको हाय कहा तो वो मुजपे गुस्से मे बरसते हूऐ बोली " कयु मे तुमको पागल और कमजोर लगती हु ?
लँबुजी, तुम भी कुछ खास हट्टेँ कट्टेँ बोँडी बिंलडर नही होँ, अब कभी भी मेरी बुराई की तो मे तुमको उठाके फैँक दुगीँ, समज गये " मेने कहा " मे समज गया स्वितीजी, बस मुजे प्लीज उठा के फेकना मत ।
मेरी बात सुनके वो हस पडी और बोली "गभरावो मत तुम ईतने लँबे होँ के वैसे भी मे तुमको उठा नही शकती " मैने मुशकुराते कहा "कया बात करती हो वैसे तुमने तो मेरा वजन पहेली ही मुलाकात मेँ उठा लिया था जब मे गलती से तुमारे उपर पड गया था"
ईस तरह मेरी स्विती सेँ दोस्ती होँ गई । मे ऐक दीन स्विती के साथ पत्तते खेल रहा था मैँने कहा चलो अगर तुम ने मुजे हरा दीया तो जोँ तुम कहोँ मेँ वोँ करुगा और तुम हार गई तो जोँ मे कहु वो तुमेँ करना पडेँगा बोलो शँत मजुंर है ?
वो बोली ठिक हैँ और मेँ बाजी जित गया मेंने कहां तुमेँ मुजेँ किँसि करनी पडेँगीँ उसने कहा नही ये मुजसे नहीँ होँगा दुसरा कुछ माँगोँ मेँने कहा ठीक हैँ पर तुमे वो फिर देना ही पडेँगा वोँ बोली अगर गलत माँग नही होँगी तोँ दुगीँ
मैने उसेँ खडे होँने को कहा हम दोँनो खडेँ थेँ मैँने कहा चलो अब तुमे मुजेँ
ऐकबार उचकना हैँ अब ये मत बोलना तुम मुजे उठा भी नही शकती
बहुत बार तुम मुजे उठाके फेँक देँने को बोल चुकी होँ
वोँ हसँते बोलीँ अमर तुमतो कितने लँबेँ होँ मेँ तुमे नही उठा शकतीँ
ठिक हैँ चलो तूम मुजे नही उठा शकती तो मेँ तुम को उठा ता हू । वो उसके लिये भी तैयार नही हुई मैँने उसेँ बहुत समजाया पर वोँ मानती ही नही थीँ
मैँने कहा स्विती तुमेँ दोँनो मेँ सेँ ऐक बात तो माननी ही चाहिये ।
मेँ तुमको उठाता हु या फिर तुम मुजेँ उचकना होगा
प्लीज चलो ना देँखोँ तुम शँत हार गई होँ
वैसे भी तुम तो कहेती थी के तुम कमजोर नही तो कया तुम मुजे थोडा उपर उठा नही शकती ?
वो मुशकराते बोली ठिक हैँ बाबा चलोँ
मेँ तुमको उचकती हूँ कहेके वो मेरी तरफ मुह करके खडी हो गई
और फीर बिना जुके ही उसने मेरे पैर उसकी बाँहो मेँ भरेँ औँर
मुजेँ थोँडा सा उपर किया और छोड डियाँ बोली "बस" मैने कहा कया बस मेरे पैँर तो जमीन सेँ उपर भी नही उठेँ ओर तुमने तो सिँफ थोडा मुजेँ उपर कर के छोड डिया ये थोडी चलेगाँ
वो बिलकुल मेरे सामने खडी थी मैने ऐकदम सेँ जुक के उसके दोनोँ पैँर मेरी बाहोँ मेँ लिये और उसेँ सिघा उपर कि और उठाते कहा देखो ऐसे उठाते हैँ और वो जैसेँ करगरा ने लगी प्लीज अमर मुजे नीचे उतारोँ प्लीज प्लीज
मैने उसे नीचे उतारा और उसके पैर जमीन पेँ पडते ही वोँ भाँग ने लगी के तभी मेँने उसका हाथ पकड लीया और कहाँ तुम चीँटीँग करके अगर भाग ना चाहोँ तो ठिक हैँ मेँ तुमेँ नही रोकुगा बोलके उसका हाथ मैने छोड डिया
वो थोडी देँर रुक के जैसे कुछ शोँच मे पड गई और बोली अमर चलो ठिक हैँ
मे तुमको उठा शकती हू लेकिन तुमे मुजे ऐक प्रोमिश करना होँगा के ये बात तुम किसी से भी नही कहोगे
मैने कहा मे ये बात कीसी से भी नही कहुगा मे प्रोमिश देता हुँ
स्विती मेरे सामने खडी होँ गई घीरे से वो मेरी जयादा लँबाई के बजे से थोडी नीचे जुकी ।
उसने मेरे दोनोँ पैर को उसकी नाजुक बाँहोँ मेँ कश के पकडेँ मेरा लँड
कडक होके उसके नरम स्तनो के उपर तकराया ओर फिर वो सिघी खडी होँ गई
मेरे पैर जमीन से उपर हो गये ।
स्विती ने उसके हाथ और नरम सिने के
बिच मे मुजे जकड के पुरा उठा लिया था
मेरा लँड स्विती के दो स्तनो के बिच दब रहा था
मुजे जमीन से बहुत उपर मेरे से कम वजनकि
पतली स्विती ने अपनी बाहोँ मे ऐकदम आसानी से उठाया था
मेँ सब कुछ भुलके जैसे मेँ स्वँग पहुच गया । मेरा लँड भी खडा होँके स्विती के गँरम स्तनो को जैसे चुम रहा था ।
2 मिनिट मे हकिकत को भुल गया के स्विती ने मेरा वजन उठाये रखा हैँ
आँखे बंघ करके मे सपनो कि दुनीया या स्वँग मे चला गया था तभी मेरे कानो मेँ स्विती कि आवाज आई
"अब शँत पुरी हो गई हो तो मे तुमे निचे उतार शकती हू ?"
मेँ होश मेँ आया देखा तो मेरे पेन्ट के अंदर मेरी चड्डी गीली हो चुकी थीँ जिसका पता शायद स्विती को भी चल गया होगा इसिलिये मेरे कहेने के बाद ही
स्विती ने मुजे निचे रखा था स्विती ने पहेली बार मुजे उचका था और लगभग दो मीनीट तक मुजे अपनी बाहोँ मे उठाये रखा था ।


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